भाजपा की सबसे बड़ी खाज था आडवाणी जो बोलने से पहले खासता और बोलने के बाद हाफता
लोकसभा से राजसभा तक राज करेगा ऐसा उसका ख्वाब था अध्यक्ष पद का बड़ा नाज था
बेचारा वाजपेयी चुपचाप था पचासी का हो गया फिर भी नही कापता बार बार ब्रेक मारता
बोलते वक्त हर शब्द को जांचता बड़ी मुश्किल से बाहर निकालता पर उस पर किसी को नही विश्वास था
इसीलिए उसकी सलाह का उसके सुझाव का भाजपा के भाषणो मे इस मर्तबा नही चुनाव था
आडवाणी की तरफ सबका झुकाव था और आडवाणी रथ पर चढ़कर नाचता मानो कही का महाराज था
साला बहुत बड़ा चालबाज था किसी जमाने मे मुसलमानो के खिलाफ था और इसी बात का कांग्रेस को लाभ था
वैसे भी आडवाणी न था काम का न काज का उससे तो अच्छा है सीधा सादा मनमोहना ही बने प्रधानमंत्री आज का
Sunday, May 24, 2009
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